भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट:जो बुजुर्ग बीमार, चल-फिर भी नहीं सकते, अब उनके घर पहुंचेगा इलाज

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06-February-2026 12:01:00
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भोपाल, 80 साल की शांति बाई पिछले दो साल से बिस्तर पर हैं। घुटनों ने साथ छोड़ दिया है। परिजन नौकरी पर चले जाते हैं। अस्पताल जाना उनके लिए पहाड़ चढ़ने जैसा है। दर्द बढ़ता है, बीपी ऊपर चला जाता है, लेकिन इलाज सिर्फ दवाइयों तक सीमित रह जाता है।

ऐसे ही हालात में जी रहे प्रदेश के बुजुर्गों के लिए अब राहत की बात है। स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे कर ऐसे 1 लाख बुजुर्गों का चयन किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) के तहत ‘होप’ (होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डरली) योजना शुरू की गई है। इसके तहत नर्सिंग स्टाफ खुद बुजुर्गों के घर जाकर उनकी जांच और इलाज करेगा।

‘होप’ योजना क्या है और क्यों शुरू की गई? ‘होप’ एनएचएम की योजना है। इसका उद्देश्य उन बुजुर्गों तक इलाज पहुंचाना है, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं। लकवा या अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं या जिन्हें मेंटल केयर की जरूरत है। मप्र में ऐसे करीब 1 लाख बुजुर्ग हैं, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल है। इसी जरूरत को देखते हुए यह सुविधा शुरू की है।

योजना अभी कहां लागू है और कितने बुजुर्ग जुड़े हैं? फिलहाल यह योजना प्रथम चरण में प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के 6 प्रमुख जिलों-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा के शहरी क्षेत्रों में लागू की गई है। यहां अब तक 1214 बुजुर्गों का ‘होप एप’ में रजिस्ट्रेशन हो चुका है। 346 बुजुर्गों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग की जा चुकी है। सबसे ज्यादा मरीज भोपाल से हैं।

इलाज और मॉनीटरिंग कैसे होगी? हर आशा कार्यकर्ता सर्वे करेगी। शहरी स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर का जिम्मा होगा कि वे ऐसे बुजुर्गों का चयन कर ‘होप एप’ में एंट्री करें। इसके बाद नर्सिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी होगी। नर्सिंग ऑफिसर ‘होप किट’ लेकर बुजुर्ग के घर जाएंगी। बीपी, शुगर, वजन और अन्य जरूरी जांच करेंगी। फॉलोअप प्लान तैयार करेंगी। होप किट में ग्लूकोमीटर, बीपी मशीन, वेइंग मशीन जैसे उपकरण होंगे। सारी जानकारी ‘होप एप’ में डिजिटल रूप से दर्ज होगी, ताकि इलाज में निरंतरता बनी रहे। जरूरत पड़ने पर टेलीमानस के जरिए डॉक्टर से भी जोड़ा जाएगा।

सिर्फ जांच होगी या देखभाल भी सिखाई जाएगी? इसके तहत- नर्सिंग केयर, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, साइकोसोशल सपोर्ट, रिहैबिलिटेशन व फिजियोथेरेपी भी शामिल है। घर के सदस्यों को भी बुजुर्ग की देखभाल करना बताएंगे।

क्यों जरूरी है यह योजना? 2025 की स्थिति में मप्र के 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 57.12 लाख है। 2050 तक यह संख्या 1.82 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। इसके लिए यह सुविधा शुरू ​की है।

यह योजना बुजुर्गों के लिए नई उम्मीद जैसी यह कार्यक्रम खास तौर पर उन वृद्धजनों के लिए है जो लकवा, ऑपरेशन के बाद की कमजोरी या गंभीर बीमारियों के कारण चल-फिर नहीं सकते। ऐसे बुजुर्ग जिनकी दुनिया अब चार दीवारों तक सीमित हो गई है, उनके लिए यह योजना नई उम्मीद जैसी है। डॉ. सलोनी सिडाना, एमडी, एनएचएम



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