60 साल में 8 नेशनल अवॉर्ड और 10 भाषाओं में 50000 गाने, कोई न तोड़ पाया इस सिंगर का पहाड़ जैसा रिकॉर्ड
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12-January-2026 12:51:34
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आज हम जिस महान सिंगर की बात कर रहे हैं, उनकी आवाज में एक अनोखी मिठास और गहरी भावना समाई हुई थी। उनकी प्रतिभा और पावर ऐसी थी कि उनके फैंस ने उन्हें 'गणगंधर्व' (दिव्य सिंगर) की उपाधि से नवाजा। छह दशकों के अपने करियर में उन्होंने कई भाषाओं में 50,000 से अधिक गाने गाए। 10 जनवरी, 1940 को केरल में जन्मे सिंगर के गाने हमेशा के लिए सदाबहार क्लासिक बन गए।
उनकी उपलब्धियों की बराबरी बहुत कम कलाकार कर पाए हैं। हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, ओडिया और यहां तक कि अंग्रेजी, अरबी, लैटिन और रूसी भाषाओं में गाकर उन्होंने सारे रिकॉर्ड ही अपने नाम कर लिए। बेस्ट सिंगर के लिए आठ नेशनल अवॉर्ड्स पाने के साथ उनका रिकॉर्ड बेजोड़ है, जो उन्हें एक अलग ही मुकाम पर रखता है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं वो कौन हैं?
के.जे. येसुदास के बारे में सब जानिए
हम बात कर रहे हैं के.जे. येसुदास की। कोच्चि में संगीत और थिएटर से गहराई से जुड़े परिवार में जन्मे, उनका पालन-पोषण ऐसे माहौल में हुआ जहां शास्त्रीय संगीत का बहुत महत्व था। उनके पिता, एक सम्मानित मलयालम शास्त्रीय संगीतकार और एक्टर थे, वो उनके पहले गुरु बने।
येसुदास की पहली रिकॉर्डिंग 'जाति भेदम माथा द्वेषम'
1961 में रिलीज हुई उनकी पहली रिकॉर्डिंग 'जाति भेदम माथा द्वेषम', ने साबित कर दिया कि एक सिंगर उभरकर सामने आ रहे हैं। लेकिन असली पहचान कई साल बाद एक मलयालम फिल्म से मिली जिसने सब कुछ बदल दिया। इस सफलता ने एक ऐसे करियर की शुरुआत की जहां भक्ति भाव और सिनेमा, दोनों साथ चलता था।
येसुदास का पहला हिंदी गाना 'जय जवान जय किसान'
इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। हालांकि उनका पहला हिंदी गाना 'जय जवान जय किसान' (1971) में रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन 'छोटी सी बात' ने दर्शकों को उनका दीवाना बना दिया। 'जानेमन जानेमन' जैसे गानों में उनकी अलग छाप झलकती है, जो साबित करती है कि वे भारतीय सिनेमा में भी मिसाल कायम कर गए।
के.जे. येसुदास ने एक दिन में गाए 11 गाने
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माइक्रोफोन रिकॉर्डिंग से परे थी। उन्होंने एक ही दिन में 11 अलग-अलग भाषाओं में 11 गाने गाए थे। जी हां। 2021 तक उन्होंने संगीत जगत में 60 साल पूरे कर लिए थे। वर्षों से गाए गए गानों की संख्या ने उन्हें लता मंगेशकर जैसी महान हस्तियों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित वे हमेशा अपनी अलग पहचान बनाए रखने में कामयाब रहे। उन्हें इतनी तारीफें मिलीं कि एक बार उन्होंने मजाक में कहा था कि अब बस बहुत हो गया।
संगीत की मजबूत विरासत
अवॉर्ड या रिकॉर्ड्स से कहीं अधिक, उनकी संगीत की विरासत आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है। आज, जब केजे येसुदास 86 साल के हो गए हैं, तो फैंस और इंडस्ट्री के लोगों ने सोशल मीडिया पर इस दिग्गज गायक के लिए शुभकामनाओं की बाढ़ ला दी है।
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