28000 किमी रफ्तार और 3000 डिग्री गर्मी...क्या धरती पर लौट पाएंगी सुनीता विलियम्स? री-एंट्री कोरिडोर में उल्का पिंड भी खाक

Update On
13-February-2025 16:15:08
Post View
2623
नई दिल्ली: 8 महीने से अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को तय समय से पहले ही धरती पर लाया जा सकता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार ‘स्पेसएक्स’ आगामी अंतरिक्ष यात्री उड़ानों के लिए कैप्सूल बदलेगा, ताकि बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स को मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत के बजाय मार्च के मध्य में ही वापस लाया जा सके। परीक्षण पायलटों को जून में बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल पर वापस लाया जाना था। हालांकि, कैप्सूल को अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने में इतनी परेशानी हुई कि नासा ने इसे खाली वापस लाने का फैसला किया। इसके बाद स्पेसएक्स ने अधिक तैयारियों की जरूरत को देखते हुए नए कैप्सूल को भेजने में देरी की, जिससे सुनीता और बुच को वापस लाने के मिशन में और देर हुई। अब 12 मार्च को नए कैप्सूल का प्रक्षेपण किया जाएगा। बीते साल 5 जून को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यान में हीलियम की लीकेज की समस्या आई थी। इसके 5 थ्रस्टर भी खराब हो गए थे। यहां तक कि यान को बिजली देने वाला सर्विस मॉड्यूल में भी दिक्कतें आईं। अंतरिक्ष यान के धरती के वातावरण में एंट्री को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व साइंटिस्ट विनोद कुमार श्रीवास्तव से समझते हैं।

धरती में एंट्री के लिए रखनी होगी 7.8 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार


इसरो साइंटिस्ट विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, किसी भी वस्तु को पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रवेश के लिए 7.8 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार रखनी होगी। चूंकि, स्पेसयान के पास हाई काइनेटिक एनर्जी होती है, ऐसे में धरती के एटमॉस्फियर में एंट्री के लिए इस एनर्जी को बचाए रखने की जरूरत होती है। धरती के वातावरण में री-एंट्री के लिए इसीलिए रेट्रोरॉकेट का इस्तेमाल करना होता है। पैराशूट या एयर ब्रेक का इस्तेमाल करने से पहले क्रू मेंबर्स को अंतरिक्ष वाहनों को सबसोनिक गति तक धीमा किया जाना चाहिए।

क्या होती है सबसोनिक स्पीड, जिस पर होती है एंट्री


सबसोनिक स्पीड ध्वनि की गति से कम गति होती है। समुद्र तल पर ध्वनि की गति करीब 768 मील प्रति घंटा (1,236 किलोमीटर प्रति घंटा) होती है। इसे 'मैक 1' के नाम से जाना जाता है। सबसोनिक हवाई जहाज, वाणिज्यिक एयरलाइनर, निजी जेट और सैन्य हवाई जहाज मैक 0.6 से मैक 0.9 की रफ्तार से उड़ते हैं।

सुनीता की सकुशल वापसी की चुनौती क्या होगी?


विनोद कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि आपको याद होगा, जब अंतरिक्ष यान कोलंबिया के 7 अंतरिक्ष यात्रियों के स्पेस शटल की री-एंट्री के वक्त ही जलकर खाक हो गया था। दरअसल, री-एंट्री स्पेस शटल के लिए विशेष रूप से खतरनाक समय है। एक ऐसा समय जिसके दौरान शटल को ज्यादा प्रेशर और हाई टेंपरेचर से गुजरना पड़ता है। वास्तव में शटल को गर्म करने के लिए दो अलग-अलग घटनाएं काम करती हैं, कंप्रेसिव हीटिंग और फ्रिक्शन।

कल्पना चावला का मिशन भी ऐसे ही हुआ था खत्म


1 फरवरी, 2003 को भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला समेत 7 अंतरिक्षयात्रियों की उस वक्त मौत हो गई, जब उनका यान धरती की कक्षा में री-एंट्री कर रहा था। कोलंबिया स्पेस शटल मिशन STS-107 लैंडिंग से ठीक 16 मिनट पहले टूटकर बिखर गया। नासा की जांच में पता चला कि लॉन्चिंग वाले दिन यानी 16 जनवरी को शटल के बाहरी टैंक से फोम इंसुलेशन का एक टुकड़ा टूटकर गिर गया। इस टुकड़े ने शटल के बाएं पंख पर एक छेद कर दिया।

इस छोटी सी दरार ने पूरे मिशन को तबाह कर दिया। जब शटल वायुमंडल में एंट्री कर रहा था, तो गर्म गैसें उस छेद से भीतर घुस गईं और बाएं पंख को नष्ट कर दिया। 1 फरवरी 2003 को शटल की लैंडिंग के दौरान असामान्य तापमान और प्रेशर की वजह से कुछ ही मिनटों में स्पेसक्राफ्ट आग के गोले में बदल गया।

धरती पर लौटने कै दौरान खास गलियारे से गुजरना होगा


वैज्ञानिक विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन धरती से करीब 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। जब कोई यान धरती से करीब 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर धरती के वायुमंडल में एक खास गलियारे से एंट्री करता है, तभी वह सफलतापूर्वक धरती पर लौट पाएगा। इसमें जरा सी चूक से यान ब्रह्मंड में लौट जाएगा और उसका चक्कर लगाता रह सकता है। इसे रीएंट्री कॉरिडोर कहा जाता है। अगर इसमें जरा सी चूक हुई तो यह यान आग का गोला बन सकता है।

इस गलियारे में किस एंगल से होनी चाहिए एंट्री


विनोद कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि धरती पर एंट्री करने के दौरान यान एक विशेष एंगल से प्रवेश करता है। यह एंगल 94.71 डिग्री से लेकर 99.80 डिग्री तक होता है। हर एंट्री एंगल से धरती के वातावरण में प्रवेश करने के बाद कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा पूरा जल जाएगा और नीचे का हिस्सा, जिसमें यात्री रहते हैं वो पैराशूट से नीचे आ जाते हैं।

री-एंट्री के दौरान क्या होता है, कैसे हवा होती है गर्म


शायद आपने देखा होगा कि जब आप साइकिल पंप का इस्तेमाल करते हैं तो पंप के अंत में लगी फिटिंग बहुत जल्दी गर्म हो जाती है। वह गर्मी मुख्य रूप से आपकी मांसपेशियों द्वारा प्लंजर पर दबाव डालने और पंप में हवा को दबाने से आती है। जब हवा (या उस पदार्थ के लिए कोई गैस) को दबाया जाता है तो वह गर्म हो जाती है। वहीं, इसके विपरीत जब यह फैलती है तो यही हवा ठंडी हो जाती है।

28 हजार किमी की रफ्तार से होती है री-एंट्री


शुरुआत में शटल अंतरिक्ष की शून्यता में जबरदस्त गति से पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। अंतरिक्ष यात्री कुछ थ्रस्टर्स चलाकर गति धीमी कर देते हैं और गुरुत्वाकर्षण शटल को निचली कक्षा में खींचने लगता है। जैसे-जैसे शटल नीचे आता है, यह 17,000 मील प्रति घंटे यानी करीब 28,000 किलोमीटर की स्पीड से धरती के वायुमंडल के करीब आने लग जता है। री-एंट्री के दौरान शटल इतनी तेजी से जा रहा होता है कि वह अपने आगे की हवा को दबा देता है।

शटल के किनारों का टेंपरेचर 3,000 डिग्री पहुंच जाता है


शटल के अगले किनारों के पास हवा की परतें दब जाती है, जिससे हवा का तापमान 3000 डिग्री फॉरेनहाइट तक बढ़ जाता है! शटल के संपर्क में रहने से यह शटल की सतह को गर्म कर देता है। आम तौर पर इतना ज्यादा तापमान किसी भी चीज को पिघला देगा। उल्का की चट्टान से लेकर अंतरिक्ष यान की धातु को भी यह पिघला सकता है। यही वजह है कि शटल को इन्सुलेशन की एक परत की आवश्यकता होती है, ताकि इसके बाहरी किनारे इतने गर्म न हो सकें।

किन चीजों से की जाती हैं शटल के इन्सुलेशन की कोटिंग


शटल ऐसे एंगल पर वायुमंडल में प्रवेश करता है कि उसकी नाक और निचला हिस्सा हवा के संपर्क में आता है और उसे बहुत हाई प्रेशर पर दबा देता है। इस दौरान उससे निकली गर्मी को सोखता जाता है। इस काम में उसकी मदद यही कोटिंग काम आती है, जो सिलिका की बनी होती है। ये गर्मी प्रतिरोधी होती है। ये सिलिका टाइलें शटल को गर्म नहीं होने देते हैं। ये टाइल्स न हों तो शटल की बाहरी परत का तापमान 3000 डिग्री तक पहुंच सकता है और इससे शटल पिघल सकता है।

किस ग्रह के लिए एंट्री कितनी होती है अलग


पृथ्वी के लिए वायुमंडलीय प्रवेश सतह से करीब 80 किमी की ऊंचाई पर कार्मन रेखा पर परंपरा के अनुसार होता है, जबकि शुक्र पर वायुमंडलीय प्रवेश 250 किमी पर होता है और मंगल पर वायुमंडलीय प्रवेश लगभग 80 किमी पर होता है। अनियंत्रित वस्तुएं पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर तेजी से बढ़ते हुए ज्यादा स्पीड से पहुंचती हैं और पृथ्वी के वायुमंडल का सामना करने पर घर्षण से धीमी हो जाती हैं। उल्कापिंड भी अक्सर पृथ्वी के सापेक्ष काफी तेजी से यात्रा कर रहे हैं, क्योंकि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का अच्छी तरह से सामना करने से पहले उनका अपना कक्षीय पथ पृथ्वी से अलग है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 15 February 2025
एजेंसी, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के जिले प्रयागराज में कुंभ जा रहे श्रद्धालुओं का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें 10 की मौके पर मौत हो गई। 19 घायल बताए जा रहे हैं। सभी…
 13 February 2025
नई दिल्ली: 8 महीने से अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को तय समय से पहले ही धरती पर लाया जा सकता…
 13 February 2025
नई दिल्ली : वक्फ संशोधन बिल पर बनी जेपीसी की रिपोर्ट को लेकर गुरुवार को जैसे ही संसद की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने हंगामा करना शुरू कर दिया। लोकसभा की…
 13 February 2025
नई दिल्ली: भारत और फ्रांस आपसी रक्षा समझौतों की दिशा में मील का एक नया पत्थर पार करने वाले हैं। संभव है कि भारत का पिनाका मिसाइल सिस्टम फ्रांस की सेना…
 13 February 2025
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फ्रांस के बाद अमेरिका के दौरे पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति मैक्रों उन्हें विदा करने के लिए खुद एयरपोर्ट पर पहुंचे। भारत-फ्रांस अडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR)…
 13 February 2025
नई दिल्ली: प्रयागराज में लगे महाकुंभ को लेकर एक और झूठा दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यूजर्स एक वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि…
 13 February 2025
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट) का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। किसी को सिर्फ जेल में रखने के लिए PMLA…
 11 December 2024
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि, युवाओं की अचानक मौत की वजह कोविड वैक्सीन नहीं है। नड्डा ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)…
 11 December 2024
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हेरफेर का आरोप लगाते हुए विपक्षी गठबंधन अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले की घोषणा…
Advt.